लोकसभा में गुरुवार को परीक्षा संशोधन बिल भारी हंगामे के बीच पास हो गया. इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपना पूरा भाषण नहीं दे पाए. राहुल गांधी ने सदन में आरोप लगाया कि जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था. इस आरोप पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और राहुल गांधी से माफी मांगने को कहा. शाम को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी, जिसके जवाब में बीजेपी ने भी अपना पक्ष रखने का ऐलान किया.

बिल पर बहस के दौरान क्या हुआ

गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही गृह मंत्री अमित शाह को लेकर विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी. विपक्ष की मांग थी कि अमित शाह सदन में आकर प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल हुए पैलेट गन के मुद्दे पर जवाब दें. स्पीकर ने कहा कि बिल पेपर लीक से जुड़ा है और उससे संबंधित मंत्री सदन में मौजूद हैं. करीब एक बजे राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हुए और उन्होंने पैलेट गन चलाने का दावा किया, जिस पर सदन में तुरंत हंगामा शुरू हो गया.

राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय धर्मेंद्र प्रधान नहीं बल्कि उनके ओएसडी चला रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि देश की सभी यूनिवर्सिटी में आरएसएस से जुड़े लोगों को वाइस चांसलर बनाया गया है. लेकिन सबसे ज्यादा हंगामा तब हुआ जब राहुल गांधी ने सीधे अमित शाह के आदेश पर पैलेट गन चलाने की बात कही. सत्ता पक्ष ने इस बयान को गंभीर आरोप बताते हुए राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की. समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष ने कोई गंभीर आरोप लगाया है तो सरकार को यह बताना चाहिए कि छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार किसके आदेश पर हुआ.

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने अखिलेश यादव को टोकते हुए कहा कि राहुल गांधी ने जांच की बात नहीं की, बल्कि सीधे नाम लेकर फायरिंग का आदेश देने का आरोप लगाया. राहुल गांधी का भाषण कुल 53 मिनट का तय था, लेकिन हंगामे की वजह से वे केवल 16 मिनट ही बोल पाए. स्पीकर ने उन्हें भाषण के दौरान 12 बार टोका, जबकि किरण रिजिजू करीब आठ बार खड़े हुए. दोपहर तीन बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर गोली चली ही नहीं, केवल आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि गोली चलाने का आदेश कोई मंत्री नहीं, बल्कि मैजिस्ट्रेट या एसडीएम देता है. संसद के बाहर बीजेपी की प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी दावा किया कि छात्रों पर गोली चली ही नहीं और राहुल गांधी झूठा आरोप लगाकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं.

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या दावे किए गए

सदन में बोलने का पूरा मौका न मिलने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी ने शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि उन्हें स्पीकर से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद बोलने नहीं दिया गया और उनसे कहा गया कि अगर वे माफी मांगें तभी उन्हें बोलने दिया जाएगा. राहुल गांधी ने साफ कहा कि वे बीजेपी या आरएसएस से जुड़े किसी भी व्यक्ति से माफी नहीं मांगेंगे.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने एम्स की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि एक छात्र की आंख में पैलेट लगने से उसकी आंख की रोशनी जाने की आशंका है. उन्होंने यह भी कहा कि लाठियों में कीलें लगाकर छात्रों, महिलाओं और नाबालिगों तक को पीटा गया और सादे कपड़ों में मौजूद लोग भी इस पिटाई में शामिल थे, जिनकी पहचान अब तक साफ नहीं है. राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने 25 जुलाई को अमित शाह को चिट्ठी लिखकर दो सवाल पूछे थे, पहला यह कि क्या उन्होंने पैलेट गन के इस्तेमाल की मंजूरी दी और दूसरा यह कि सादे कपड़ों में मौजूद लोग कौन थे. उनका कहना था कि इस चिट्ठी की पावती तो मिली, लेकिन जवाब अब तक नहीं आया.

राहुल गांधी ने कहा कि दो ही संभावनाएं हो सकती हैं, या तो अमित शाह ने खुद पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश दिया, या फिर उन्हें इस बारे में पता ही नहीं था. उनके मुताबिक पहली स्थिति में गृह मंत्री दोषी हैं और दूसरी स्थिति में वे अपने काम में अक्षम साबित होते हैं. उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति से इस पूरे मामले की जांच कराई जाए और अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए. कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भी कहा कि गृह मंत्री को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए, जबकि प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा.

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बिल को लेकर विपक्ष की आपत्ति

राहुल गांधी ने परीक्षा संशोधन बिल पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि यह बिल पेपर लीक रोकने के बजाय केवल सजा की अवधि एक साल से बढ़ाकर दस साल करता है, जबकि अब तक इस मामले में किसी को सजा नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि असली समस्या शिक्षा तंत्र में आरएसएस से जुड़े लोगों की मौजूदगी है और सरकार उस मूल समस्या को हल करने के बजाय केवल कानून में बदलाव कर रही है.

पत्रकारों के सवालों के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स, दोनों ही गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं, इसलिए किसी भी कार्रवाई की जिम्मेदारी अंततः गृह मंत्री की ही बनती है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज एफआईआर और उनकी परेशानी को लेकर वे चिंतित हैं और सरकार से मांग करेंगे कि किसी निर्दोष छात्र को परेशान न किया जाए.

इस पूरे विवाद पर बीजेपी की ओर से किरण रिजिजू पहले ही कह चुके थे कि राहुल गांधी ने सदन को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन खुद ही मुश्किल में फंस गए. सरकार की ओर से यह भी दोहराया गया कि पेपर लीक बिल को पेपर लीक रोकने का नहीं बल्कि पेपर लीक के लिए सजा बढ़ाने का कानून बताया गया है. राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में बीजेपी ने शाम सात बजे अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का ऐलान किया, जिसमें पार्टी की ओर से इन आरोपों का औपचारिक जवाब दिए जाने की उम्मीद जताई गई.

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