लोकसभा में विपक्षी सांसद अभिषेक बनर्जी ने परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने सदन में कहा कि पिछले कई सालों में देशभर में परीक्षाओं के पेपर बार-बार लीक हुए हैं, जिससे लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं। भाषण में उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में दस साल की सरकार के दौरान बीस से ज्यादा परीक्षाएं लीक हो चुकी हैं। उन्होंने नीट परीक्षा, प्राइमरी स्कूलों के बंद होने और शिक्षक भर्ती घोटाले जैसे मुद्दों पर भी सवाल खड़े किए।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

पेपर लीक के आरोप और आंकड़े

सांसद ने सदन में कहा कि दरोगा भर्ती, जूनियर इंजीनियरिंग भर्ती, ग्राम विकास पंचायत अधिकारी परीक्षा और नलकूप चालक भर्ती के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। उनके अनुसार यूपीटीईटी की परीक्षा तीन बार लीक हुई, जबकि हाई स्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड की परीक्षाएं भी एक से अधिक बार प्रभावित हुईं। सिपाही भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक होने की बात उन्होंने रखी। नीट परीक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि यह पहली बार लीक नहीं हुई और नया कानून बनने के बाद भी दोबारा लीक हुई। उन्होंने सहायक प्रोफेसर भर्ती और लेखपाल भर्ती में भी गड़बड़ी का जिक्र किया।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि जो संस्था सबसे अहम परीक्षाएं करवाती है, उसमें आउटसोर्स कर्मचारी रखे गए हैं। उनका कहना था कि जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होनी चाहिए और यह पता लगना चाहिए कि आखिर कौन लोग परीक्षा में गड़बड़ी में शामिल थे। सदन में उन्होंने यह भी कहा कि नया कानून पुराने कानून में संशोधन करके लाया गया है, जिससे उन्हें सवाल पूछने की जरूरत महसूस हुई कि क्या यह कानून असल समस्या का समाधान करेगा।

Advertisement
Advertisement

प्राइमरी स्कूल बंद होने पर उठाया मुद्दा

भाषण में सांसद ने कहा कि सरकार बनने के बाद से स्कूल, परीक्षा और यूनिवर्सिटी व्यवस्था कमजोर हुई है। उनके अनुसार सरकार ने सबसे पहले प्राइमरी स्कूलों पर असर डाला, क्योंकि गरीब परिवारों के बच्चे मुख्यतः सरकारी प्राथमिक स्कूलों से पढ़ते हैं। उन्होंने सरकार के ही आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देशभर में एक लाख से ज्यादा सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद हुए हैं। सात लाख से ऊपर स्कूल पहले थे, जो अब घटकर छह लाख रह गए हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक स्कूल बंद होने की बात उन्होंने रखी और आंकड़ा बताया कि राज्य में दो लाख तिरसठ हजार आठ सौ छियासी सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद कर दिए गए।

Advertisement
Advertisement

उन्होंने 69,000 शिक्षक भर्ती को लेकर भी बड़े स्तर पर गड़बड़ी का आरोप लगाया और कहा कि इससे जुड़े लोग सालों से आंदोलन कर रहे हैं और अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। मंत्रियों के दफ्तर से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक इन अभ्यर्थियों ने गुहार लगाई है, लेकिन नौकरी नहीं मिल पाई है। सांसद ने दावा किया कि इस भर्ती से सबसे ज्यादा नुकसान पिछड़े और दलित परिवारों के अभ्यर्थियों को हुआ है। उन्होंने माध्यमिक स्कूलों के बंद होने का भी जिक्र किया और कहा कि दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के पेपर भी बड़े पैमाने पर लीक हुए हैं।

नीट परीक्षा में मौतों पर श्रद्धांजलि, मुआवजे की मांग

सदन में सांसद ने नीट परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद कुछ छात्राओं की जान जाने का उल्लेख किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और उम्मीद जताई कि सरकार इस मांग को स्वीकार करेगी।

उच्च शिक्षा में नियुक्तियों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि जब किसी संस्था के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति निष्पक्ष नहीं होता तो पूरी संस्था प्रभावित होती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में एक स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर बनी मौलाना जौहर यूनिवर्सिटी का जिक्र किया और आरोप लगाया कि सरकार ने खुद कोई नई सरकारी यूनिवर्सिटी नहीं बनाई, बल्कि मौजूदा प्राइवेट यूनिवर्सिटी को गिराने की तैयारी की जा रही है।

अग्निवीर भर्ती योजना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पहले हर साल अस्सी हजार भर्तियां हुआ करती थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर दस हजार रह गई है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर युवाओं की पढ़ाई और नौकरी पर हमला क्यों हो रहा है, जबकि देश के युवाओं को डेमोग्राफिक डिविडेंड बताया जाता है।

भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि कानून बनाने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि नीयत साफ होने पर ही परीक्षा प्रणाली में सुधार संभव है। उन्होंने पिछले साल भी इसी तरह का बिल लाए जाने का जिक्र करते हुए पूछा कि उसके बावजूद नीट का पेपर दोबारा कैसे लीक हुआ। दिल्ली में हुए एक छात्र आंदोलन के दौरान आंसू गैस और अन्य कार्रवाई का हवाला देते हुए उन्होंने इसकी तुलना आपातकाल के दौर से की। उन्होंने कहा कि आपातकाल के बाद जिस तरह बदलाव आया था, उसी तरह इस बार भी बदलाव आएगा। भाषण का समापन उन्होंने यह कहते हुए किया कि शिक्षा की रक्षा के लिए चल रहा आंदोलन अंतिम सफल होगा।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement