प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार संसद के आगामी मॉनसून सत्र में एक देश, एक चुनाव और परिसीमन बिल जैसे संविधान संशोधन वाले विधेयक दोबारा पेश कर सकती है.
इन विधेयकों को पारित कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में तय संख्या का समर्थन चाहिए लोकसभा में सांसदों की मौजूदा संख्या, रिक्त सीटें और अलग अलग दलों के रुख पर चर्चा तेज है. पिछले तीन महीनों में दलों के भीतर हुए घटनाक्रम ने लोकसभा के आंकड़ों को भी प्रभावित किया है.
संविधान संशोधन का गणित
संविधान में संशोधन करने वाले किसी भी विधेयक को संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा, में दो चरण पूरे करने होते हैं. पहला, सदन के कुल सदस्यों की संख्या के आधे से अधिक सदस्यों का समर्थन मिलना चाहिए. दूसरा, मतदान के समय मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों में कम से कम दो तिहाई का समर्थन मिलना जरूरी होता है.
अप्रैल महीने में इसी गणित के कारण सरकार को 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर सफलता नहीं मिली थी यह विधेयक महिलाओं को आरक्षण देने और लोकसभा के साथ विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा था. मतदान में सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े थे और विपक्ष में 230 वोट मिले थे. कुल 528 सांसदों ने मतदान किया था उस समय विधेयक पारित कराने के लिए 352 वोट चाहिए थे सरकार 54 वोट कम रह गई और विधेयक पारित नहीं हो सका उस मतदान ने दिखाया कि सामान्य बहुमत वाले विधेयकों और संविधान संशोधन वाले विधेयकों के लिए जरूरी संख्या में अंतर है.
अप्रैल के बाद तीन महीनों में संसद के आंकड़ों में कई बदलाव आए हैं. किसी नए आम चुनाव के बिना दलबदल, दलों में टूट, नए गठबंधन और रिक्त सीटों ने लोकसभा की स्थिति को बदल दिया है.
लोकसभा का मौजूदा आंकड़ा
लोकसभा की कुल 543 सीटें हैं तीन सांसदों के निधन के कारण इस समय तीन सीटें खाली हैं. सीटें खाली होने से प्रभावी संख्या कम हो जाती है. मतदान के समय यदि कुछ सांसद मौजूद नहीं रहते हैं या वॉकआउट करते हैं, तब दो तिहाई का हिसाब केवल मौजूद और मतदान करने वाले सांसदों के आधार पर किया जाता है.
लोकसभा में एनडीए के 293 सांसद हैं. तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट और शिवसेना के शिंदे गुट में शामिल हुए सांसदों को जोड़ने पर यह संख्या 319 हो जाती है. यदि डीएमके का समर्थन मिलता है तो उसके 22 सांसदों के साथ यह संख्या 341 तक पहुंच सकती है. शरद पवार की पार्टी के आठ सांसदों का समर्थन मिलने पर यह संख्या 349 हो जाएगी. संविधान संशोधन के लिए 540 प्रभावी सदस्यों के आधार पर 360 सांसदों का समर्थन चाहिए.
वाईएसआरसीपी के लोकसभा में चार और राज्यसभा में सात सांसद हैं. यह दल पहले भी कई मौकों पर मोदी सरकार का समर्थन करता रहा है.
महाराष्ट्र में चल रही बैठकों के बीच एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार की महायुति के नेताओं से मुलाकात ने चर्चा बढ़ाई है. एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हुई मुलाकात को सियासी राजनीति का हिस्सा मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि यह बैठक उस उद्देश्य से नहीं थी.
विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि परिसीमन विधेयक पर अभी इंडिया गठबंधन के दलों के बीच कोई चर्चा नहीं हुई है. एनसीपी (एसपी) का कहना है कि यदि सरकार राज्यों में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या 50 फीसदी तक बढ़ाने के लिए विधेयक में संशोधन करती है, तब पार्टी चर्चा के लिए तैयार है. शरद पवार की पार्टी के इस रुख ने विपक्ष के भीतर चर्चा बढ़ा दी है.
दलों के रुख से बदले आंकड़े
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद पार्टी से अलग होकर नेशनल कॉमन पीपुल्स इनिशिएटिव (NCPI) में शामिल हो गए हैं. इन सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की है. यदि मॉनसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष इस विलय को मान्यता देते हैं, तब लोकसभा में एनडीए की संख्या बढ़ जाएगी और विपक्ष की संख्या कम हो जाएगी.
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं. यह दल एनडीए का हिस्सा है. इन सांसदों के सत्ता पक्ष में आने से विपक्ष की संख्या कम हुई है.
कांग्रेस और द्रमुक का एक दशक से अधिक पुराना गठबंधन भी टूट चुका है. डीएमके औपचारिक रूप से एनडीए में शामिल नहीं हुई है, मगर इंडिया गठबंधन में उसके नहीं रहने से विपक्ष उसके 22 लोकसभा सांसदों के समर्थन का दावा नहीं कर सकता. बीजेपी को उम्मीद है कि कुछ चुनिंदा विधेयकों पर उसे डीएमके का मुद्दों के आधार पर समर्थन मिल सकता है.