उत्तर भारत में सावन का महीना इस साल 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान चार सोमवार पड़ेंगे, जिनकी शुरुआत 3 अगस्त से होगी. न्यूमरोलॉजिस्ट, एस्ट्रोलॉजर और स्पिरिचुअल हीलिंग कोच वान्या आर्य ने एक पॉडकास्ट बातचीत में सावन मास के महत्व, शिव पूजा की विधि और इस दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 25 जुलाई को भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसके बाद संसार की जिम्मेदारी भगवान शिव को सौंपी जाती है.

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सोमवार व्रत की चार तारीखें तय

वान्या आर्य के मुताबिक सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को, दूसरा 10 अगस्त को, तीसरा 17 अगस्त को और चौथा 24 अगस्त को पड़ेगा. उनका कहना है कि सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान की गई पूजा-आराधना का विशेष फल मिलता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि सावन में फास्टिंग करने का एक वैज्ञानिक कारण भी है. बरसात के मौसम में नमी और उमस बढ़ने से बैक्टीरियल इन्फेक्शन और पानी से होने वाली बीमारियां बढ़ जाती हैं, ऐसे में व्रत रखने से एक तरह की इंटरमिटेंट फास्टिंग होती है, जिससे शरीर के अंगों को आराम मिलता है.

पंचामृत और जलाभिषेक की विधि बताई

बातचीत में पूजा विधि पर भी चर्चा हुई. वान्या आर्य ने बताया कि पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, घी, शक्कर और गंगाजल का इस्तेमाल किया जाता है और यह जल घर से ही बनाकर मंदिर ले जाना चाहिए. उन्होंने एक आम गलती की ओर इशारा किया, जिसमें भक्त जल चढ़ाते समय जलहरी को क्रॉस कर देते हैं, जिसे सही तरीका नहीं माना जाता. पूजा सामग्री में बेलपत्र, धतूरा, सफेद चंदन, फल, ड्राई फ्रूट्स और सफेद मिठाई शामिल करने की सलाह दी गई. साथ ही ओम नमः शिवाय के जाप और शिवाष्टकम के साथ साथ त्र्यंबकम मंत्र पढ़ने का सुझाव भी दिया गया.

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नीचे दी गई तालिका में सावन 2026 की मुख्य तारीखें दर्ज हैं.

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विवरणतारीख
सावन मास शुरू (उत्तर भारत)30 जुलाई
भगवान विष्णु योग निद्रा में25 जुलाई
पहला सोमवार3 अगस्त
दूसरा सोमवार10 अगस्त
तीसरा सोमवार17 अगस्त
चौथा सोमवार24 अगस्त
सावन मास समाप्त28 अगस्त

मां की सेवा और हरी चूड़ियों की परंपरा

वान्या आर्य ने बताया कि जो लोग भगवान शिव की आराधना करते हैं, उनके लिए मां की सेवा करना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि इससे चंद्रमा मजबूत होता है. उन्होंने सुझाव दिया कि रोज सुबह मां के पैर छूने चाहिए और उनकी किसी भी परेशानी में मदद करनी चाहिए. महिलाओं के लिए हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में शादी का रंग लाल माना जाता है जबकि महाराष्ट्र में यह हरा होता है. अविवाहित लोगों के लिए मां पार्वती को हरी साड़ी अर्पित करने और शिव-पार्वती का कलावे से गठबंधन करने की बात भी बताई गई.

दान से जुड़ी एक सलाह में उन्होंने कहा कि सोमवार के दिन गरीबों, विधवाओं या अनाथालयों में दूध, चीनी, फल या भोजन का दान किया जा सकता है, लेकिन इसे सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं करना चाहिए. उन्होंने पेड़ लगाने की एक विधि भी सुझाई, जिसमें एक पर्ची पर इच्छा लिखकर पौधे की जड़ में रखी जाती है, उसके बाद मिट्टी और पानी डाला जाता है.

अंत में वान्या आर्य ने कहा कि सावन में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोमवार व्रत रखना अनिवार्य नहीं है और जो लोग व्रत नहीं रख पाते, वे सिर्फ जलाभिषेक और मंत्र जाप के जरिए भी पूजा कर सकते हैं.

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