शुक्रवार के दिन शेयर बाजार में अडानी ग्रुप के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली. अडानी एंटरप्राइजेज से लेकर अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी पावर और अंबुजा सीमेंट्स तक लगभग पूरा ग्रुप नुकसान में कारोबार करता दिखा.
बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद अडानी ग्रुप से जुड़ी कंपनियों में बिकवाली बढ़ गई, जिससे निवेशकों के बीच हलचल देखने को मिली. यह गिरावट किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं रही,
बल्कि अलग-अलग सेक्टर में मौजूद अडानी ग्रुप की कई कंपनियों पर इसका असर पड़ा. शुक्रवार की ट्रेडिंग के दौरान कई शेयर अपने दिन के निचले स्तर तक पहुंच गए, जिससे यह साफ हो गया कि दबाव पूरे ग्रुप पर बना हुआ है.
शेयरों में गिरावट की वजह अमेरिका की एसईसी से जुड़ा मामला
अडानी ग्रुप के शेयरों में आई इस गिरावट की वजह अमेरिका की सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी एसईसी से जुड़ा एक केस बताया जा रहा है. यह मामला नवंबर 2024 में अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट में सामने आया था.
इस केस में गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी से जुड़े आरोप लगाए गए थे. शुक्रवार को शेयरों में गिरावट तब तेज हुई जब इस केस में एसईसी ने कोर्ट से जुड़ा एक नया कदम उठाया. इसी कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी खबर के सामने आने के बाद बाजार में अडानी ग्रुप के शेयरों पर दबाव बढ़ गया.
पावर परचेस एग्रीमेंट्स को लेकर लगाए गए हैं आरोप
इस केस में आरोप लगाया गया है कि अडानी ग्रुप के कुछ सीनियर अधिकारियों, खासतौर पर गौतम अडानी और सागर अडानी, भारत में बिजली से जुड़े पावर परचेस एग्रीमेंट्स हासिल करने के लिए एक कथित रिश्वत योजना से जुड़े हो सकते हैं.
अमेरिकी जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस कथित योजना की रकम करीब 265 मिलियन डॉलर बताई गई है. आरोप यह है कि इस योजना का मकसद अडानी ग्रीन एनर्जी से बनने वाली बिजली के लिए लंबे समय के सरकारी पावर परचेस एग्रीमेंट्स हासिल करना था. इन आरोपों को लेकर अभी तक किसी अदालत ने कोई फैसला नहीं सुनाया है और मामला कानूनी प्रक्रिया में है.
अमेरिकी निवेशकों को दी गई जानकारी को लेकर भी सवाल
एसईसी की कंप्लेंट में यह भी कहा गया है कि इन कथित गतिविधियों के बावजूद अमेरिकी निवेशकों को दी गई जानकारी में कंपनी की एंटी करप्शन प्रैक्टिसेस को लेकर पूरी जानकारी नहीं दी गई. आरोप यह है कि अमेरिकी निवेशकों और बैंकों को रिस्क डिस्क्लोजर के दौरान पूरी तस्वीर नहीं दिखाई गई.
एसईसी का कहना है कि जिन बातों का जिक्र किया जाना चाहिए था, वे जानकारी में शामिल नहीं थीं. हालांकि यह भी साफ किया गया है कि ये सभी आरोप हैं और अभी तक अदालत ने इन्हें साबित नहीं किया है.
समंस भेजने को लेकर एसईसी ने कोर्ट से मांगी अनुमति
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब एसईसी ने अमेरिकी कोर्ट से यह अनुमति मांगी कि वह गौतम अडानी और सागर अडानी को लीगल समंस और कंप्लेंट सीधे ईमेल के जरिए भेज सके. चूंकि दोनों भारत में रहते हैं, इसलिए अमेरिका की एजेंसी को हेग सर्विस कन्वेंशन नाम की अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है.
एसईसी का कहना है कि पिछले एक साल में कई कोशिशों के बावजूद भारत की संबंधित एजेंसियों के जरिए यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है. इसी वजह से अब कोर्ट से यह अनुमति मांगी गई है कि समंस ईमेल के जरिए भेजे जा सकें.
एसईसी का तर्क और कानूनी प्रक्रिया की स्थिति
एसईसी ने कोर्ट में यह तर्क दिया है कि अडानी ग्रुप की लीगल टीम पहले से इस केस के बारे में जानती है, क्योंकि यह मामला सार्वजनिक रिकॉर्ड में मौजूद है. एजेंसी का कहना है कि ईमेल के जरिए समंस भेजना कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है. यह कदम सिर्फ प्रक्रिया से जुड़ा है और इसका मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने किसी तरह का फैसला सुना दिया है. इसके बावजूद इस खबर को बाजार ने गंभीरता से लिया और शेयरों पर असर साफ दिखाई दिया.
सबसे ज्यादा गिरावट किन अडानी शेयरों में देखी गई
शुक्रवार की गिरावट में अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर सबसे ज्यादा टूटे और इसमें करीब 12 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई. अडानी एंटरप्राइजेज, जिसे पूरे ग्रुप का फ्लैगशिप माना जाता है, करीब 11 फीसदी नीचे कारोबार करता दिखा.
इसके अलावा अडानी पोर्ट्स, अडानी पावर और अडानी टोटल गैस के शेयरों में भी 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई. सीमेंट सेक्टर की कंपनियां अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी भी दबाव में रहीं. इससे यह साफ हो गया कि असर सिर्फ एक या दो कंपनियों तक सीमित नहीं था.
इस गिरावट को लेकर बाजार की प्रतिक्रिया
शेयर बाजार ने इस कानूनी मामले से जुड़े नए घटनाक्रम को गंभीरता से लिया. निवेशकों के बीच यह चिंता दिखी कि यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रह सकता है और इसका असर शेयरों की चाल पर बना रह सकता है.
बाजार में ऐसी स्थितियों में अक्सर निवेशक जोखिम कम करने की कोशिश करते हैं, जिससे बिकवाली बढ़ जाती है. शुक्रवार को अडानी ग्रुप के शेयरों में जो गिरावट दिखी, वह किसी ताजा बिजनेस संकट की वजह से नहीं बल्कि इस कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी खबरों के बाद बाजार की प्रतिक्रिया को दर्शाती है.
अडानी ग्रुप के शेयर और मौजूदा हालात
इस पूरे घटनाक्रम से यह बात सामने आती है कि फिलहाल अडानी ग्रुप के शेयर कारोबारी नतीजों से ज्यादा कानूनी और रेगुलेटरी मामलों से जुड़ी खबरों पर प्रतिक्रिया कर रहे हैं.
शुक्रवार की गिरावट यह दिखाती है कि ऐसे मामलों में छोटी-सी खबर भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती है. यह स्थिति आने वाले समय में कैसे बदलती है, यह इस केस से जुड़ी आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल बाजार में इसका असर साफ तौर पर देखा गया.
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