- अमेरिकी घटनाक्रम के बाद भारतीय IT सेक्टर में भारी गिरावट
- निफ्टी IT इंडेक्स करीब 8% टूटा
- तीन ट्रेडिंग सेशंस में लगभग ₹5 लाख करोड़ की वैल्यू खत्म
- एंथ्रोपिक के CTO राहुल पाटिल के नेतृत्व में क्लॉड का नया AI वर्जन
- AI अब लीगल, कोडिंग, SAP/ERP और एंड-टू-एंड वर्कफ्लो संभालने में सक्षम
- “Always-on AI Agent” से IT सर्विस और SaaS कंपनियों पर दबाव
- एंथ्रोपिक का वैल्यूएशन लगभग $183 अरब
- बेंगलुरु में एंथ्रोपिक का नया बड़ा ऑफिस, भारत पर बढ़ता फोकस
अमेरिका से आई एक खबर के बाद भारत के आईटी सेक्टर में तेज गिरावट देखी गई। भारतीय आईटी कंपनियों के मार्केट कैप से करीब ढाई लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। बड़ी और जानी मानी आईटी कंपनियों को इस गिरावट का सीधा असर झेलना पड़ा। यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। दुनिया की बड़ी सॉफ्टवेयर और आईटी सर्विस कंपनियों के मार्केट कैप से भी अरबों डॉलर निकल गए। इसी घटनाक्रम के बाद शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई और निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ी।
दुनिया भर की आईटी कंपनियों में बिकवाली का माहौल
इस गिरावट को केवल एक देश की कहानी नहीं माना जा रहा। दुनिया भर में बड़ी सॉफ्टवेयर और आईटी सर्विस कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। अरबों डॉलर की वैल्यू कम हुई। बाजार में यह चर्चा तेज हुई कि जिस बदलाव ने यह हालात पैदा किए, वह टेक इंडस्ट्री के मौजूदा तरीके को सीधे प्रभावित कर रहा है। इसी बीच यह भी सामने आया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक भारतीय दिमाग की बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
राहुल पाटिल और एंथ्रोपिक से जुड़ी कहानी
इस पूरे घटनाक्रम में राहुल पाटिल का नाम सामने आया। राहुल पाटिल एआई स्टार्टअप कंपनी एंथ्रोपिक के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर हैं। उन्हें अक्टूबर 2025 में इस पद पर लाया गया था। मौजूदा हालात को कई जगह “पाटिल इफेक्ट” कहा जाने लगा है। बताया गया कि एंथ्रोपिक की ओर से हाल में जो नया रिलीज आया, उसी ने बाजार में बड़ा असर डाला। राहुल पाटिल को इसी बदलाव का श्रेय दिया जा रहा है।
क्लॉड के नए वर्जन से बदला काम करने का तरीका
एंथ्रोपिक का एआई समाधान “क्लॉड” पहले एक चैटबॉट के रूप में जाना जाता था। इसमें यूजर सवाल पूछते थे और जवाब मिल जाता था। अब इसके नए वर्जन में बदलाव किया गया है। इसमें इंडस्ट्री से जुड़े खास टूल्स जोड़े गए हैं। यह समाधान पूरे कारोबार का एंड-टू-एंड वर्कफ्लो संभालने की क्षमता रखता है। लीगल कॉन्ट्रैक्ट्स की समीक्षा, कोड मैनेजमेंट और डॉक्यूमेंट से जुड़े काम अब बिना किसी मानवीय निगरानी के किए जा सकते हैं। इसी वजह से इस बदलाव ने आईटी सेक्टर में हलचल पैदा कर दी।
भारतीय बाजार में निफ्टी आईटी इंडेक्स की स्थिति
इस बदलाव का असर भारतीय शेयर बाजार में साफ दिखा। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 8 प्रतिशत तक गिर गया। पिछले तीन ट्रेडिंग सेशंस में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू कम हुई। इस दौरान यह भी चर्चा में रहा कि क्लॉड के ऑटोमेशन टूल्स सेल्स, लीगल, मार्केटिंग और डेटा एनालिसिस जैसे क्षेत्रों में पूरे प्रोसेस को अपने आप पूरा करने की क्षमता रखते हैं। पहले माना जा रहा था कि इन क्षेत्रों में एआई से फायदा होगा, लेकिन अब सामने आया कि इन कामों में लगी कंपनियों को झटका लग सकता है।
एसएपी और ईआरपी कामों से जुड़ा दावा
इस पूरे घटनाक्रम में एक और दावा सामने आया। बताया गया कि एंथ्रोपिक का एआई प्लेटफॉर्म अब एसएपी माइग्रेशन जैसे काम हफ्तों में कर सकता है, जिनमें पहले सालों लगते थे। बड़े कॉरपोरेशन में एसएपी और ईआरपी सिस्टम के जरिए कई काम एक ही डैशबोर्ड से चलते हैं। अब तक माना जाता था कि इस तरह के कामों पर एआई का असर देर से आएगा। लेकिन इस दावे के बाद एसएपी और ईआरपी सर्विस देने वाली कंपनियों के कामकाज पर सीधा असर पड़ने की बात कही जाने लगी।
एंथ्रोपिक में राहुल पाटिल की भूमिका
राहुल पाटिल को एंथ्रोपिक में इसलिए लाया गया था ताकि क्लॉड को बड़े कॉरपोरेट इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सके। उनका काम यह सुनिश्चित करना था कि यह एआई बड़े पैमाने पर काम कर सके और इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पीड और लागत का ध्यान रखा जाए। बताया गया कि उन्होंने टीमों को इस दिशा में काम करने के लिए आगे बढ़ाया कि कम लागत वाले चिप्स पर बेहतर आउटपुट मिले। इससे मेमोरी का बेहतर इस्तेमाल हुआ और प्रोसेसिंग तेज हुई। इसी के साथ प्रोडक्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई इंजीनियरिंग टीमों को साथ बैठकर काम करने की व्यवस्था की गई।
ऑलवेज ऑन एआई एजेंट की उपलब्धता
इन बदलावों के बाद एंथ्रोपिक ऐसी स्थिति में पहुंच गई है कि वह कंपनियों को ऑलवेज ऑन एआई एजेंट देने में सक्षम हो गई है। यह एआई एजेंट लगातार काम करता है और उसे छुट्टी या आराम की जरूरत नहीं होती। पहले कंपनियां केवल अपने एआई मॉडल तक पहुंच देती थीं। अब कंपनियों के पास पूरा एआई समाधान आ गया है, जिससे वे अपने कारोबार के कई हिस्से चला सकती हैं। इसी बदलाव को बाजार में “पाटिल इफेक्ट” कहा जा रहा है।
सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में फैली बेचैनी
इस बदलाव के बाद सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस पर काम करने वाली कंपनियों को लेकर चिंता बढ़ गई। बाजार में यह धारणा बनी कि एआई के जरिए पूरा वर्कफ्लो चलाया जा सकता है और इसमें मानवीय निगरानी की जरूरत नहीं रहेगी। इसी कारण बाजार में बिकवाली तेज हुई। निवेशक तब तक दूर रहने की बात कर रहे हैं, जब तक यह साफ न हो जाए कि इस बदलाव से निपटने का रास्ता क्या है।
राहुल पाटिल का करियर और पढ़ाई
राहुल पाटिल का करियर लंबे समय का रहा है। उन्होंने बेंगलुरु की पीईएस यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद वह अमेरिका गए और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी से एमएस किया। बाद में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन से एमबीए भी किया। उन्होंने करीब नौ साल माइक्रोसॉफ्ट में काम किया। इसके बाद वह अमेजन काइनेसिस और एडब्ल्यूएस से जुड़े। फिर ओरेकल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बने, जहां वह करीब 30 प्रोडक्ट्स की देखरेख करते थे।
स्ट्राइप से एंथ्रोपिक तक का सफर
एंथ्रोपिक में आने से पहले राहुल पाटिल ने स्ट्राइप में करीब पांच साल काम किया। वहां उन्होंने इंजीनियरिंग और ग्लोबल ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभाली। एंथ्रोपिक जॉइन करते समय उन्होंने लिंक्डइन पर पोस्ट लिखी थी, जिसमें उन्होंने कंपनी की टीम की सराहना की थी। इसके बाद एंथ्रोपिक ने तेजी से नए कदम उठाए और बाजार में हलचल बढ़ी।
बेंगलुरु में एंथ्रोपिक का विस्तार
अब एंथ्रोपिक बेंगलुरु में बड़ा ऑफिस खोलने की तैयारी कर रहा है। इसे टोक्यो के बाद कंपनी का दूसरा बड़ा हब बताया जा रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि कंपनी भारत से टैलेंट लेने और यहां एआई से जुड़ा काम बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। फिलहाल यह कंपनी स्टार्टअप कही जाती है, लेकिन इसका वैल्यूएशन करीब 183 अरब डॉलर बताया गया है।
फंडिंग और रेवेन्यू से जुड़ी जानकारी
एंथ्रोपिक को हाल में 13 बिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है। इस फंडिंग का नेतृत्व आइकनिक ने किया। इसमें अमेजन, फिडेलिटी और लाइटस्पीड जैसे निवेशक शामिल हैं। कंपनी ने बताया है कि उसका रेवेन्यू रन रेट 5 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है और यह कमाई 2025 के बीच हासिल की गई है।
बाजार की नजर एंथ्रोपिक पर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एंथ्रोपिक और राहुल पाटिल टेक्नोलॉजी और शेयर बाजार की चर्चाओं में आ गए हैं। जिस बदलाव ने आईटी सेक्टर में इतनी बड़ी हलचल पैदा की है, उस पर अब पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। बाजार यह देख रहा है कि आने वाले समय में कंपनी किस दिशा में कदम बढ़ाती है और यह बदलाव उद्योग को किस तरह प्रभावित करता है।



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