भारत में एलपीजी की खपत लगातार बढ़ रही है। देश हर साल करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी इस्तेमाल करता है। इसमें 87 प्रतिशत गैस घरेलू उपयोग में जाती है, जबकि लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा होटल और रेस्तरां जैसे कमर्शियल सेक्टर में उपयोग होता है। देश की कुल एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत अपनी लगभग 62 प्रतिशत एलपीजी जरूरत दूसरे देशों से खरीदकर पूरी करता है।

पश्चिम एशिया के तनाव का असर

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। इस स्थिति का असर ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है और कई जगह गैस की उपलब्धता पर दबाव बना है। भारत में भी एलपीजी और नैचुरल गैस की कमी की खबरें सामने आईं। स्थिति को देखते हुए सरकार ने घरेलू और वाणिज्यिक गैस के वितरण से जुड़े कुछ नियमों में तत्काल बदलाव किए ताकि सप्लाई बनी रहे।

कनाडा ने दिया LNG सप्लाई प्रस्ताव

कनाडा ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एलएनजी सप्लाई का प्रस्ताव दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनका देश ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत क्षमता रखता है और भारत की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है और कनाडा इस मांग को पूरा करने में भरोसेमंद साझेदार बन सकता है।

मार्क कार्नी का बयान

बुधवार को मार्क कार्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपना एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने कहा कि कनाडा में तैयार होने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस कम कार्बन उत्सर्जन के साथ उत्पादित होती है और इसकी सप्लाई भरोसेमंद मानी जाती है। उन्होंने बताया कि इस गैस का उपयोग एशिया और यूरोप के कई देशों में हीटिंग, बिजली उत्पादन और उद्योगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से कतर से आने वाली गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके कारण कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई पैटर्न में बदलाव देखा गया है।

ऊर्जा और नवीकरणीय लक्ष्य

मार्क कार्नी ने कहा कि भारत इस दशक के अंत तक अपनी रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को 500 गीगावाट तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। साथ ही भारत अपने ऊर्जा मिश्रण में एलएनजी की हिस्सेदारी को भी लगभग दोगुना करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका कहना था कि ऐसे समय में कनाडा भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में एक अहम साझेदार बन सकता है और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ सकता है।

महत्वपूर्ण खनिजों की पेशकश

कनाडा के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन टेक्नोलॉजी और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों के लिए कई महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत पड़ेगी। इस मामले में कनाडा के पास बड़े संसाधन मौजूद हैं और दुनिया की प्रमुख माइनिंग कंपनियां वहां काम कर रही हैं। उनके अनुसार दुनिया की करीब 40 प्रतिशत माइनिंग कंपनियां कनाडा में सूचीबद्ध हैं। पिछले महीने कनाडा के सरकारी ब्रॉडकास्टर CBC की रिपोर्ट में यह सामने आया कि भारत ने कनाडा को संकेत दिया है कि वह वहां से उपलब्ध ऊर्जा संसाधन जैसे कच्चा तेल, एलपीजी, एलएनजी और यूरेनियम खरीदने के लिए तैयार है। भारत ने यह भी अनुरोध किया कि मंजूरी से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाए ताकि बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा जरूरतें तेजी से पूरी हो सकें।